Tag Archives: Naye Kabi Ka Dukh

Naye Kabi Ka Dukh – Kedarnath Singh

दुख हूँ मैं एक नये हिन्दी कवि काबाँधो मुझे बाँधो पर कहाँ बाँधोगे किस लय, किस छन्द में? ये छोटे छोटे घर ये बौने दरवाजे ताले ये इतने पुराने और साँकल इतनी जर्जर आसमान इतना जरा सा और हवा इतनी … Continue reading

Rate this:

Posted in Hindi Poem | Tagged , , , , | Leave a comment