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कविता – फसल

मैं उसे बरसों से जानता था- एक अधेड़ किसान थोड़ा थका थोड़ा झुका हुआ किसी बोझ से नहीं सिर्फ़ धरती के उस सहज गुरुत्वाकर्षं से जिसे वह इतना प्यार करता था वह मानता था- दुनिया में कुत्ते बिल्लियाँ सूअर सबकी … Continue reading

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