अंधेरे पाख का चांद – केदारनाथ सिंह 

जैसे जेल में लालटेनचाँद उसी तरह

एक पेड़ की नंगी डाल से झूलता हुआ

और हम

यानी पृथ्वी के सारे के सारे क़ैदी खुश

कि चलो कुछ तो है

जिसमें हम देख सकते हैं

एक-दूसरे का चेहरा!