Category Archives: Hindi Poems

शमा गुल हो गयी दिल बुझ गया परवाने का – Yaas Yagana Changezi

सिलसिला छिड़ गया जब यास के फ़साने का शमा गुल हो गयी दिल बुझ गया परवाने का वाए हसरत कि ताल्लुक़ न हुआ दिल को कहीं न तो काबे का हुआ मैं न तो सनम-खाने का खिल्वत-ए-नाज़ कुजा और कुजा … Continue reading

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Mujhe Dil Kii Khataa Par – Yaas Yagana Changenzi

mujhe dil kii Khataa par ‘Yaas’ sharmaanaa nahii.n aataa paraayaa jurm apane naam likhavaanaa nahii.n aataa buraa ho paa-e-sar_kash kaa ki thak jaanaa nahii.n aataa kabhii gum_raah ho kar raah par aanaa nahii.n aataa mujhe ai naaKhudaa aaKhir kisii ko … Continue reading

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इल्म क्या इल्म की हकीक़त क्या – Yaas Yagana Changezi

किसकी आवाज़ कान में आई दूर की बात ध्यान में आयी आप आते रहे बुलाते रहे आने वाली एक आन में आयी यह किनारा चला कि नाव चली कहिये क्या बात ध्यान में आयी! इल्म क्या इल्म की हकीक़त क्या … Continue reading

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बुनाई का गीत  – केदारनाथ सिंह 

उठो सोये हुए धागोंउठो उठो कि दर्जी की मशीन चलने लगी है उठो कि धोबी पहुँच गया घाट पर उठो कि नंगधड़ंग बच्चे जा रहे हैं स्कूल उठो मेरी सुबह के धागो और मेरी शाम के धागों उठो उठो कि … Continue reading

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Basanta – Kedarnath Singh

और बसन्त फिर आ रहा है शाकुन्तल का एक पन्ना मेरी अलमारी से निकलकर हवा में फरफरा रहा है फरफरा रहा है कि मैं उठूँ और आस-पास फैली हुई चीज़ों के कानों में कह दूँ ‘ना’ एक दृढ़ और छोटी-सी … Continue reading

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Poem – Corruption

शीश कटाते फौजी देखे,  आँख दिखाता पाकिस्तान,  भाव गिराता रुपया देखा,  जान गँवाता हुआ किसान,  बहनो की इज्ज़त लुटती देखीं,  काम खोजता हर नौजवान,  कोई तो मुझको यह बता दे.. यह कैसा भारत निर्माण.. अन्न गोदामो में सड़ते देखा,  भूख … Continue reading

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पानी में घिरे हुए लोग  – केदारनाथ सिंह 

पानी में घिरे हुए लोगप्रार्थना नहीं करते वे पूरे विश्वास से देखते हैं पानी को और एक दिन बिना किसी सूचना के खच्चर बैल या भैंस की पीठ पर घर-असबाब लादकर चल देते हैं कहीं और यह कितना अद्भुत है … Continue reading

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