Category Archives: Hindi Poem

izhaar – ahmed nadeem qasmi

Tujhe izhaar-e-muhabbat se agar nafrat hai tuu ne honToN ko larazne se to rokaa hotaa be-niyaazii se, magar kaaNptii aavaaz ke saath tuu ne ghabraa ke miraa naam na puuchaa hotaa tere bas meN thii agar mash’al-e-jazbaat kii lau tere … Continue reading

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patthar – ahmed nadeem qasmi

ret se but na banaa ai mere achchhe fankaar ek lamhe ko Thahar, maiN tujhe patthar laa duuN maiN tere saamane ambaar lagaa duuN lekin kaun se rang kaa patthar tere kaam aayegaa surKh patthar jise dil kahatii hai bedil … Continue reading

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प्रतीक्षा – Harivansh Rai Bachchan

मधुर प्रतीक्षा ही जब इतनी, प्रिय तुम आते तब क्या होता? मौन रात इस भांति कि जैसे, कोई गत वीण पर बज कर, अभी-अभी सोई खोई-सी, सपनों में तारों पर सिर धर और दिशाओं से प्रतिध्वनियाँ, जाग्रत सुधियों-सी आती हैं, … Continue reading

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साथी, सब कुछ सहना होगा – Harivansh Rai Bachchan

मानव पर जगती का शासन, जगती पर संसृति का बंधन, संसृति को भी और किसी के प्रतिबंधों में रहना होगा! साथी, सब कुछ सहना होगा! हम क्या हैं जगती के सर में! जगती क्या, संसृति सागर में! एक प्रबल धारा … Continue reading

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था तुम्हें मैंने रुलाया – Harivansh Rai Bachchan

हा, तुम्हारी मृदुल इच्छा! हाय, मेरी कटु अनिच्छा! था बहुत माँगा ना तुमने किन्तु वह भी दे ना पाया! था तुम्हें मैंने रुलाया! स्नेह का वह कण तरल था, मधु न था, न सुधा-गरल था, एक क्षण को भी, सरलते, … Continue reading

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Yatra Aur Yatri – Harivansh Rai Bachchan

साँस चलती है तुझे चलना पड़ेगा ही मुसाफिर! चल रहा है तारकों का दल गगन में गीत गाता चल रहा आकाश भी है शून्य में भ्रमता-भ्रमाता पाँव के नीचे पड़ी अचला नहीं, यह चंचला है एक कण भी, एक क्षण … Continue reading

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शमा गुल हो गयी दिल बुझ गया परवाने का – Yaas Yagana Changezi

सिलसिला छिड़ गया जब यास के फ़साने का शमा गुल हो गयी दिल बुझ गया परवाने का वाए हसरत कि ताल्लुक़ न हुआ दिल को कहीं न तो काबे का हुआ मैं न तो सनम-खाने का खिल्वत-ए-नाज़ कुजा और कुजा … Continue reading

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