Category Archives: Hindi Poem

do pran mile – gopal singh nepali

दो मेघ मिले बोले-डोले, बरसाकर दो-दो बूँद चले । भौंरों को देख उड़े भौरें, कलियों को देख हँसी कलियाँ, कुंजों को देख निकुंज हिले, गलियों को देख बसी गलियाँ, गुदगुदा मधुप को, फूलों को, किरणों ने कहा जवानी लो, झोंकों … Continue reading

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navin kalpana karo – gopal singh nepali

निज राष्ट्र के शरीर के सिंगार के लिए तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो, तुम कल्पना करो। अब देश है स्वतंत्र, मेदिनी स्वतंत्र है मधुमास है स्वतंत्र, चांदनी स्वतंत्र है हर दीप है स्वतंत्र, रोशनी स्वतंत्र है अब शक्ति की … Continue reading

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sarita – gopal singh nepali

यह लघु सरिता का बहता जल कितना शीतल¸ कितना निर्मल¸ हिमगिरि के हिम से निकल-निकल¸ यह विमल दूध-सा हिम का जल¸ कर-कर निनाद कल-कल¸ छल-छल बहता आता नीचे पल पल तन का चंचल मन का विह्वल। यह लघु सरिता का … Continue reading

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basant git – gopal singh nepali

ओ मृगनैनी, ओ पिक बैनी, तेरे सामने बाँसुरिया झूठी है! रग-रग में इतना रंग भरा, कि रंगीन चुनरिया झूठी है! मुख भी तेरा इतना गोरा, बिना चाँद का है पूनम! है दरस-परस इतना शीतल, शरीर नहीं है शबनम! अलकें-पलकें इतनी … Continue reading

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कविता – दिशा

हिमालय किधर है? मैंने उस बच्‍चे से पूछा जो स्‍कूल के बाहर पतंग उड़ा रहा था उधर-उधर-उसने कहाँ जिधर उसकी पतंग भागी जा रही थी मैं स्‍वीकार करूँ मैंने पहली बार जाना हिमालय किधर है?

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कविता – फसल

मैं उसे बरसों से जानता था- एक अधेड़ किसान थोड़ा थका थोड़ा झुका हुआ किसी बोझ से नहीं सिर्फ़ धरती के उस सहज गुरुत्वाकर्षं से जिसे वह इतना प्यार करता था वह मानता था- दुनिया में कुत्ते बिल्लियाँ सूअर सबकी … Continue reading

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mein tujhe ko bhool chuka – ahmed nadeem qasmi

Mein tujhe ko bhool chuka, Lekin aik umar ke baad Tera kheyal kya tha ke chott ubhar aayi

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