Blind Man – Rohit Singh

I saw a blind man, today.

He was trembling on his way.

There, standing.

I started wondering.

I wanted to help him as much as I can.

But how much can I really help that old man? 

I am using all that I have and all that I can get, 

For my life to be set, 

But I am nowhere near to getting that done.

And I am still looking at the sun.
Even if I work all my life, 

I am not sure enough that, 

I can solve his strife.
But there are some, 

Who don’t need to pay to live.

You know where they are from! ! ! 

There they can’t even see any blind man’s strife, 

In their whole life. 

Appetite- Rohit Singh

Human need.

How much more are we going to bleed? 

We are running, 

From the moment we can run.

To get just one thing done.

But with every moving step, 

We got our appetite up, up and up. 

पानी में घिरे हुए लोग  – केदारनाथ सिंह 

पानी में घिरे हुए लोगप्रार्थना नहीं करते

वे पूरे विश्वास से देखते हैं पानी को

और एक दिन

बिना किसी सूचना के

खच्चर बैल या भैंस की पीठ पर

घर-असबाब लादकर

चल देते हैं कहीं और
यह कितना अद्भुत है

कि बाढ़ चाहे जितनी भयानक हो

उन्हें पानी में थोड़ी-सी जगह ज़रूर मिल जाती है

थोड़ी-सी धूप

थोड़ा-सा आसमान

फिर वे गाड़ देते हैं खम्भे

तान देते हैं बोरे

उलझा देते हैं मूंज की रस्सियां और टाट

पानी में घिरे हुए लोग

अपने साथ ले आते हैं पुआल की गंध

वे ले आते हैं आम की गुठलियां

खाली टिन

भुने हुए चने

वे ले आते हैं चिलम और आग
फिर बह जाते हैं उनके मवेशी

उनकी पूजा की घंटी बह जाती है

बह जाती है महावीर जी की आदमकद मूर्ति

घरों की कच्ची दीवारें

दीवारों पर बने हुए हाथी-घोड़े

फूल-पत्ते

पाट-पटोरे

सब बह जाते हैं

मगर पानी में घिरे हुए लोग

शिकायत नहीं करते

वे हर कीमत पर अपनी चिलम के छेद में

कहीं न कहीं बचा रखते हैं

थोड़ी-सी आग
फिर डूब जाता है सूरज

कहीं से आती हैं

पानी पर तैरती हुई

लोगों के बोलने की तेज आवाजें

कहीं से उठता है धुआं

पेड़ों पर मंडराता हुआ

और पानी में घिरे हुए लोग

हो जाते हैं बेचैन
वे जला देते हैं

एक टुटही लालटेन

टांग देते हैं किसी ऊंचे बांस पर

ताकि उनके होने की खबर

पानी के पार तक पहुंचती रहे
फिर उस मद्धिम रोशनी में

पानी की आंखों में

आंखें डाले हुए

वे रात-भर खड़े रहते हैं

पानी के सामने

पानी की तरफ

पानी के खिलाफ
सिर्फ उनके अंदर

अरार की तरह

हर बार कुछ टूटता है

हर बार पानी में कुछ गिरता है

छपाक……..छपाक…….