यतिसम्म प्रीति गरी – मोतीराम भट्ट

यति सम्म प्रीति गरी गरी न यता भयें न उता भयें,
नत मन् लियें नत दीदियें न यता भयें न उता भयें ।

नत होस् वासकि राखियो नत फूलको रस चाखियो,
नत याद भो नत स्वाद भो, न यता भयें न उता भयें ।

बिनु औसरै सित भेट्नू तरबार लीकन रेट्नू,
नत छिन्दिनू, नत नछिन्दिनू, न यता भयें न उता भयें ।

नत साथ बस्न सँगी भयें नत दुस्मनै सरि भै गएँ
न पुरानियाँ नत मो नयाँ न यता भयें न उता भयें ।

नत खुस् भईकन प्रेम् गरी तन रिस् गरी कन मन् हरी
न यसो गरी न उसो गरी न यता भएँ न उता भयें ।

मोतीराम भट्ट

moti-ram-bhatta

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